मत छुओ इस झील को।
कंकड़ी मारो नहीं,
पत्तियाँ डारो नहीं,
फूल मत बोरो।
और कागज की तरी इसमें नहीं छोड़ो।
खेल में तुमको पुलक-उन्मेष होता है,
लहर बनने में सलिल को क्लेश होता है।
मत छुओ इस झील को।
कंकड़ी मारो नहीं,
पत्तियाँ डारो नहीं,
फूल मत बोरो।
और कागज की तरी इसमें नहीं छोड़ो।
खेल में तुमको पुलक-उन्मेष होता है,
लहर बनने में सलिल को क्लेश होता है।

Ramdhari Singh, known by his nom de plume Dinkar, was an Indian Hindi poet, essayist, patriot and academic, who is considered as one of the most important modern Hindi poets. He remerged as a poet of rebellion as a consequence of his nationalist poetry writte…
View profile & all 56 Poems / Storiesमाया के मोहक वन की क्या कहूँ कहानी परदेशी?भय है, सुन कर हँस दोगे मेरी नादानी परदेशी!
मैं चरणॊं से लिपट रहा था, सिर से मुझे लगाया क्यों?पूजा का साहित्य पुजारी पर इस भाँति चढ़ाया क्यों?
जाग रहे हम वीर जवान,जियो जियो अय हिन्दुस्तान !
धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा कुहासा,कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँ-सा।
दो में से क्या तुम्हे चाहिए कलम या कि तलवारमन में ऊँचे भाव कि तन में शक्ति विजय अपार