इलाही ख़ैर वो हरदम नई बेदाद करते हैँ
हमेँ तोहमत लगाते हैँ जो हम फरियाद करते हैँ
ये कह कहकर बसर की उम्र हमने क़ैदे उल्फत मेँ
वो अब आज़ाद करते हैँ वो अब आज़ाद करते हैँ
सितम ऐसा नहीँ देखा जफ़ा ऐसी नहीँ देखी
वो चुप रहने को कहते हैँ जो हम फरियाद करते हैँ
इलाही ख़ैर वो हरदम नई बेदाद करते हैँ
हमेँ तोहमत लगाते हैँ जो हम फरियाद करते हैँ
ये कह कहकर बसर की उम्र हमने क़ैदे उल्फत मेँ
वो अब आज़ाद करते हैँ वो अब आज़ाद करते हैँ
सितम ऐसा नहीँ देखा जफ़ा ऐसी नहीँ देखी
वो चुप रहने को कहते हैँ जो हम फरियाद करते हैँ

DescriptionRam Prasad Bismil was an Indian revolutionary who participated in Mainpuri conspiracy of 1918, and the Kakori conspiracy of 1925, and struggled against British imperialism. Bismil was hanged on 19 December 1927 by the British for his revolutionary…
View profile & all 16 Poems / Storiesमिट गया जब मिटने वाला फिर सलाम आया तो क्या !दिल की बर्वादी के बाद उनका पयाम आया तो क्या !
ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो ।प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कान्तिमय हो ।।
बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से,लटकते आए अक्सर पैकरे-ईसार फांसी से।
न चाहूँ मान दुनिया में, न चाहूँ स्वर्ग को जानामुझे वर दे यही माता रहूँ भारत पे दीवाना
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है