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बिस्मिल की उर्दू गजल

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जिन्दगी का राज

 
चर्चा अपने क़त्ल का अब दुश्मनों के दिल में है,

देखना है ये तमाशा कौन सी मंजिल में है ?


कौम पर कुर्बान होना सीख लो ऐ हिन्दियो !

ज़िन्दगी का राज़े-मुज्मिर खंजरे-क़ातिल में है !


साहिले-मक़सूद पर ले चल खुदारा नाखुदा !

आज हिन्दुस्तान की कश्ती बड़ी मुश्किल में है !


दूर हो अब हिन्द से तारीकि-ए-बुग्जो-हसद ,

अब यही हसरत यही अरमाँ हमारे दिल में है !


बामे-रफअत पर चढ़ा दो देश पर होकर फना ,

'बिस्मिल' अब इतनी हविश बाकी हमारे दिल में है !

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Sootradhar