भाषा अब वेश्या है।
सबकी बाँहों में समायी हुई,
सबके ओठों पर बसी रहती है।
उसके विवस्त्र अंगों में अब कोई अर्थनहीं।
भाषा अब वेश्या है।
सबकी बाँहों में समायी हुई,
सबके ओठों पर बसी रहती है।
उसके विवस्त्र अंगों में अब कोई अर्थनहीं।

Rajkamal Choudhary was an Indian poet, short story writer, novelist, critic and thinker in Maithili, Hindi and Bengali languages. He was known as "a bold leader of new poetry" and writer who "stands out differently" from most other experimentalists
View profile & all 23 Poems / Storiesचारों ओर अंधेरानदी तट पर, मुर्दघट्टी, खेत-खलिहान, जंगल-झाड़ में
मैंने सुनी हैं, टूटे हुए मन्दिरों में कैदभीमाकार घंटियों की ध्वनियाँ
ओ वायु के टूटे हुए पंख,ओ कवि,
वक़्त के ताबूत में सिमट नहीं पाते हैंगर्म उसके सफ़ेद हाथ । लाल फूलों से
बहुत अंधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ।मुस्कुराहटें मेरी विवश