मालवी's image
0253

मालवी

ShareBookmarks

सेवानिवृत्ति की सीढ़ियों से उतरते हुए
धरती को छू रहे हैं पाँव
वानप्रस्थ और संन्यास की संधि पर खड़े
मेरे मन के कई आवरण टूट रहे हैं
तो ब्रह्मसूत्रशांकरभाष्य के पृथुलकाय ग्रंथ के नीचे दबी
काव्यप्रकाश की किताब के पीछे
जिस किसी कोने में छिपी
मेरी असावधानी के एक क्षण में
लौट आई अकस्मात् मेरे पास : मालवी।
जैसे क्रौंचपक्षी के वध पर
कवि का शोक
श्लोक में फूटा हुआ।
कोई दो तीन वाक्य मालवी के
पत्नी से बात करते हुए सहसा मेरे मुँह से निकल गए।

अब सोचता हूँ
कौन है वह
जो इस तरह अचानक मालवी बोल पड़ा है
वह इन साठ सालों में कहाँ था
मैं अपने भीतर झाँकता हूँ
उसे पहचानने के लिए...

Read More! Learn More!

Sootradhar