गम के सहराओ में घंघोर घटा सा भी था's image
0259

गम के सहराओ में घंघोर घटा सा भी था

ShareBookmarks

गम के सहराओ में घंघोर घटा सा भी था
वो दिलावर जो कई रोज़ का प्यासा भी था॥

ज़िन्दगी उसने ख़रीदी न उसूलो के एवज़
क्योकि वो शक्स मुहम्मद का निवासा भी था॥

अपने ज़ख्मो का हमें बक्श रहा था वो सवाब
उसकी हर आह का अन्दाज़ दुआ-सा भी था॥

सिर्फ तीरो ही कि आती हुई बौछार न थी
उसको हासील गम-ए-ज़ारा का दिलासा भी था॥

जब गया वो बन के सवाली वो हुसूर-ए-यज़दा
सरे अकदस के लिए हाथ में प्यासा भी था॥

उसने बोए दिल-ए-हर-ज़र्रा में अज़मत के गुलाब
रेगज़ार उसके लहू से चमन आसा भी था॥

मैं तही रस्त न था हश्र के मैदान में 'क़तील'
चन्द अश्को का मेरे पास इफासा भी था॥

 

Read More! Learn More!

Sootradhar