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Couplets by Pratap Somvanshi

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अपने भीतर है जो इंसान बचाकर रखना
अपनी मिट्टी की ये पहचान बचाकर रखना

हिम्मत,ताकत,प्यार,भरोसा जो है सब इनसे ही है
कुछ नंबर हैं जिन पर मैंने ज्यादा फोन लगाया है

दुकानों पर यहां रिश्ते टंगे हैं
जो दिखता है वही बिकता बहुत है
भरोसा कांच सा होता है बेशक
अगर टूटे तो ये चुभता बहुत है

मेरे सिर पर हाथ रख कर मुश्किलें सब ले गया
इक दुआ के सामने हर वार छोटा पड़ गया ...
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Sootradhar