यह धन धर्म ही तें पायो's image
1 min read

यह धन धर्म ही तें पायो

ParamanandadasParamanandadas
0 Bookmarks 136 Reads0 Likes

यह धन धर्म ही तें पायो।
नीके राखि जसोदा मैया नारायण ब्रज आयो॥१॥
जा धन को मुनि जप तप खोजत वेदहुं पार न पायो।
सों धन धर्यो क्षीर सागर में ब्रह्मा जाय जगायो॥२॥
जा धन तें गोकुल सुख लहियत, सगरे काज संवारे।
सो धन वार वार उर अंतर, परमानंद विचारे॥३॥

 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts