कोई दिल-लगी दिल लगाना नहीं है

Pandit Brij Mohan Dattatreya KaifiPandit Brij Mohan Dattatreya Kaifi13 Dec 1866 – 1 Nov 1955

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कोई दिल-लगी दिल लगाना नहीं है
क़यामत है ये दिल का आना नहीं है

मनाएँ उन्हें वस्ल में किस तरह हम
ये रूठे का कोई मनाना नहीं है

है मंज़ूर उन्हंे इम्तिहाँ शौक़ दिल का
नज़ाकत का ख़ाली बहाना नहीं है

वफ़ा पर दग़ा सुलह में दुश्मनी है
भलाई का हरगिज़ ज़माना नहीं है

शब-ए-ग़म भी हो जाएगी इक दिन आख़िर
कभी इक रविश पर ज़माना नहीं है

है कू-ए-बुताँ बस घर उस का ही ‘कैफ़ी’
ज़माने में जिस को ठिकाना नहीं है

 

Pandit Brij Mohan Dattatreya Kaifi
About the poet

Pandit Brij Mohan Dattatreya Kaifi

Pandit Brij Mohan Dattatreya Kaifi Dehlavi (13 December 1866 – 1 November 1955) was an Indian Urdu language writer, poet, playwright, novelist and essayist. Brij Mohan Dattatreya Kaifi was born on 13 December 1866 in Delhi. He was a student of Altaf Hussain H…

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