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अस्यां तो कस्यां हो सकै छैकै थनै क्है दी
लूंठां सूं लूंठा दरजी कै बीबूता मं कोई न्हं
तू धार लेती तोयूं धरकार न्हं होतो जमारो।
सूरज उगढळग्यों/आंथग्यो
सतूळ की नांईकतनो बैगो ढसड़ जावै छै