प्रेम-दोय - ओम नागर

ओम नागरओम नागर20 Sept 1980

1 min read · 12.3K reads

प्रेम-
दिवलां कै ओळी-दोळी
तीतर्यां की फरक्यां
व्हां तांई
ज्यां तांई
संदी बळ’र न्हं हो जावै
भसम।
ओम नागर
About the poet

ओम नागर

View profile & all 51 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like