नागरीदास, poet
Sootradhar · Author

नागरीदास

नागरीदास

nan

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Selected Quotes

देख्यो श्रीवृंदा बिपिन पार बिच बहति महा गंभीर धार .नहिं नाव,नहिं कछु और दाव हे दई !कहा कीजै उपाव.
— नागरीदास
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चरचा करी कैसे जाय।बात जानत कछुक हमसों, कहत जिय थहराय॥
— नागरीदास
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Poetry & Stories

  1. चरचा करी कैसे जाय - नागरीदास

    चरचा करी कैसे जाय।बात जानत कछुक हमसों, कहत जिय थहराय॥

    3 min read · 12.3K reads
  2. ताननि की ताननि मही - नागरीदास

    ताननि की ताननि मही, परयौजुमन धुकि धाहिं।पैठयो रव गावत स्त्रवनि, मुख तैं निसरत आहि॥

    2 min read · 12.3K reads
  3. बोलनि ही औरैं कछू - नागरीदास

    बोलनि ही औरैं कछू, रसिक सभा की मानि।मतिवारे समझै नहीं, मतवारे लैं जानि।

    2 min read · 12.3K reads
  4. जहाँ कलह तहँ सुख नहीं - नागरीदास

    जहाँ कलह तहँ सुख नहीं,कलह सुखन को सूल.सबै कलह इक राज में,राज कलह को मूल.

    2 min read · 12.3K reads
  5. देख्यो श्रीवृंदा विपिन पार - नागरीदास

    देख्यो श्रीवृंदा बिपिन पार बिच बहति महा गंभीर धार .नहिं नाव,नहिं कछु और दाव हे दई !कहा कीजै उपाव.

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