आएगा संदीपन यहाँ's image
0200

आएगा संदीपन यहाँ

ShareBookmarks


अपने दुखों के स्नायु तंतुओं को जोड़
मैं भरता पींग छूने मन की डालों के ओर छोर
जो आश्वस्त कर सके कि
बीत जाएगा यह भी
विचलित धड़कनों में बल खाता दोपहर का अंतराल

दुनिया के हर कोने जा लिख आए वहाँ तुम
पर इस बार मैंने लिखा
मैं यहाँ आया था निराखर अहेरी
खोये आकाश के दुपहरी साये
उठाए झोला भर जीवन टूटे शब्दों का,
लाल पत्थर के स्ट्रासबर्ग कथीडरल की दीवार पर
गोया कभी पढऩे यह आश्चर्य
आएगा संदीपन यहाँ
मिट चुके लिखे भविष्य को फिर लिखने!

Read More! Learn More!

Sootradhar