यहाँ बचपन में गिरी थी बर्फ़
पहाड़ पेड़ आंगन सीढ़ियों पर
उन पर चलते हुए हम रोज़ एक रास्ता बनाते थे
बाद में जब मैं बड़ा हुआ
देखा बर्फ़ को पिघलते हुए
कुछ देर चमकता रहा पानी
अन्तत: उसे उड़ा दिया धूप ने ।
( रचनाकाल : 1996)
यहाँ बचपन में गिरी थी बर्फ़
पहाड़ पेड़ आंगन सीढ़ियों पर
उन पर चलते हुए हम रोज़ एक रास्ता बनाते थे
बाद में जब मैं बड़ा हुआ
देखा बर्फ़ को पिघलते हुए
कुछ देर चमकता रहा पानी
अन्तत: उसे उड़ा दिया धूप ने ।
( रचनाकाल : 1996)

Manglesh Dabral is a prominent contemporary Indian poet who writes in Hindi. He was born in the village of Kaphalpani, Tehri Garhwal, Uttarakhand, completed his education in Dehradun. He has served in Hindi Patriot, Pratipaksh and Aaspaas in Delhi. Books: - H…
View profile & all 49 Poems / Storiesपुरानी तस्वीरों में ऐसा क्या हैजो जब दिख जाती हैं तो मैं गौर से देखने लगता हूँ
हरा पहाड़ रात मेंसिरहाने खड़ा हो जाता है
एक गहन आत्मविश्वास से भरकरसुबह निकल पड़ता हूँ घर से
सर्दी के दिनों में जो प्रेम शुरू हुआवह बहुत सारे कपड़े पहने हुए था
एक भाषा में अ लिखना चाहता हूँअ से अनार अ से अमरूद