ख़त्म-ए-शोर-ए-तूफ़ाँ था दूर थी

Majrooh SultanpuriMajrooh Sultanpuri1 Oct 1919 – 24 May 2000

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ख़त्म-ए-शोर-ए-तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी
दम के दम में अफ़साना थी मेरी तबाही भी

इल्तफ़ात समझूँ या बेरुख़ी कहूँ इस को
रह गई ख़लिश बन कर उसकी कमनिगाही भी

याद कर वो दिन जिस दिन तेरी सख़्तगीरी पर
अश्क भर के उठी थी मेरी बेगुनाही भी

शमा भी उजाला भी मैं ही अपनी महफ़िल का
मैं ही अपनी मंज़िल का राहबर भी राही भी

गुम्बदों से पलटी है अपनी ही सदा "मजरूह"
मस्जिदों में की जाके मैं ने दादख़्वाही भी

 

Majrooh Sultanpuri
About the poet

Majrooh Sultanpuri

Asrar ul Hassan Khan (1 October 1919 − 24 May 2000), better known as Majrooh Sultanpuri, was an Indian Urdu poet. He is known for his work as an Urdu poet, and as a lyricist and songwriter in the Bollywood film industry, where he wrote Hindustani lyrics for n…

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