हर क़दम हादसे हर नफ़्स तल्ख़ियाँ

Lata HayaLata Haya

1 min read · 12.9K reads

 

हर क़दम हादसे हर नफ़्स तल्ख़ियाँ

ज़िंदगी बर्क़ तूफ़ाँ ख़िज़ाँ आँधियाँ

रफ़्ता रफ़्ता यही बोझ लगने लगीं

क्यूँ बड़ी हो गईं माँ तिरी बेटियाँ

मेरी दुनिया तिरी ज़ात में क़ैद है

मुझ को ख़ैरात में दे न आज़ादियाँ

तीरगी ख़ामुशी बेबसी तिश्नगी

हिज्र की रात में ख़ामियाँ ख़ामियाँ

आप ही आंधियों से उलझते रहे

मैं तो लाई थी दामन में पुरवाइयाँ

मैं किताबों में रख्खूँ ये फ़ितरत नहीं

फूल सूखे हुए बे-ज़बाँ तितलियाँ

ये सहीफ़ा नहीं मेरी रूदाद है

इस का उनवान है तल्ख़ियाँ तल्ख़ियाँ

याद क्या है कोई मुझ से पूछे 'हया'

एक एहसास की चंद परछाइयाँ

 
Lata Haya
About the poet

Lata Haya

मै हिंदी की वो बेटी हूँ, जिसे उर्दू ने पाला है!! Lata Haya is a popular TV actress, a social worker and a well known poet in India. She was born in Jaipur, Rajasthan and now lived in Mumbai, India. She belongs to a Hindu Marwari family. She started her carrie…

View profile & all 6 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like