ख़ुद को आसान कर रही हो ना
हम पे एहसान कर रही हो ना
ज़िंदगी हसरतों की मय्यत है
फिर भी अरमान कर रही हो ना
नींद सपने सुकून उम्मीदें
कितना नुक़सान कर रही हो ना
हम ने समझा है प्यार पर तुम तो
जान पहचान कर रही हो ना
ख़ुद को आसान कर रही हो ना
हम पे एहसान कर रही हो ना
ज़िंदगी हसरतों की मय्यत है
फिर भी अरमान कर रही हो ना
नींद सपने सुकून उम्मीदें
कितना नुक़सान कर रही हो ना
हम ने समझा है प्यार पर तुम तो
जान पहचान कर रही हो ना

Kumar Vishwas is a celebrated Indian poet and he is on the National Executive of Aam Aadmi Party. He has recited his poetry widely in India and also in USA, Singapore, Japan, and Dubai. He has been awarded certificate of recognition by California State Assemb…
View profile & all 22 Poems / Storiesएक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा,हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा ,
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता हैमगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मुझसे सुनो खूब गजलें, मधुर गीतमुझसे मेरा मात्र परिचय न पूछो
वे बोले दरबार सजाओवे बोले जयकार लगाओ
प्रतिमाओं में पूजा उलझीविधियों में उलझा भक्ति योग