दिन है
किसी और का
सोना का हिरन,
मेरा है
भैंस की खाल का
मरा दिन।
यही कहता है
वृद्ध रामदहिन
यही कहती है
उसकी धरैतिन,
जब से
चल बसा
उनका लाड़ला।
दिन है
किसी और का
सोना का हिरन,
मेरा है
भैंस की खाल का
मरा दिन।
यही कहता है
वृद्ध रामदहिन
यही कहती है
उसकी धरैतिन,
जब से
चल बसा
उनका लाड़ला।

Kedarnath Agarwal (1 April 1911–22 June 2000) was a Hindi language poet and writer.
View profile & all 22 Poems / Storiesजो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ हैतूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है
पहला पानी गिरा गगन सेउमँड़ा आतुर प्यार,
हमारी जिन्दगी के दिन,बड़े संघर्ष के दिन हैं।
देश की छाती दरकते देखता हूँ!थान खद्दर के लपेटे स्वार्थियों को,
एक हथौड़ेवाला घर में और हुआ !हाथी सा बलवान,