करि कै जु सिंगार अटारी चढी

Kavi GangKavi Gang1 Jan 1538 – 1 Jan 1625

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करि कै जु सिंगार अटारी चढी, मनि लालन सों हियरा लहक्यो।
सब अंग सुबास सुगंध लगाइ कै, बास चँ दिसि को महक्यो॥
कर तें इक कंकन छूटि परयो, सिढियाँ सिढियाँ सिढियाँ बहक्यो।
कवि 'गंग भनै इक शब्द भयो, ठननं ठननं ठननं ठहक्यो॥

Kavi Gang
About the poet

Kavi Gang

Kavi Ganga or 'Gang Kavi' (1538 -1625 AD) was the first important (Hindi) poet of the ritual poetry tradition. His real name was Gangadhar. He was the court poet of Akbar. Birth, date of birth and birthplace are controversial. By the way, they are called Bhat…

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