झुकत कृपान मयदान's image
1 min read

झुकत कृपान मयदान

Kavi GangKavi Gang
0 Bookmarks 200 Reads0 Likes

झुकत कृपान मयदान ज्यों उदोत भान,
एकन ते एक मान सुषमा जरद की.
कहै कवि गंग तेरे बल को बयारि लगे,
फूटी गजघटा घनघटा ज्यों सरद की.
एन मान सोनित की नदियाँ उमड़ चलीं,
रही न निसानी कहूँ महि में गरद की.
गौरी गह्यो गिरिपति, गनपति गह्यो गौरी,
गौरीपति गही पूँछ लपकि बरद की.

 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts