सरिता जल में
पैर डाल कर
आँखें मूंदे, शीश झुकाए
सोच रही है कब से
बादल ओढ़े घाटी।
कितने तीखे अनुतापों को
आघातों को
सहते-सहते
जाने कैसे असह दर्द के बाद-
बन गई होगी पत्थर
इस रसमय धरती की माटी।
सरिता जल में
पैर डाल कर
आँखें मूंदे, शीश झुकाए
सोच रही है कब से
बादल ओढ़े घाटी।
कितने तीखे अनुतापों को
आघातों को
सहते-सहते
जाने कैसे असह दर्द के बाद-
बन गई होगी पत्थर
इस रसमय धरती की माटी।

Jagdish Gupt (Hindi: डा. जगदीश गुप्त) (1924–2001) was a well-known poet of the Nayi kavita (नई कविता) generation, a period of Modernism in modern Indian Hindi poetry. He was chairman of the Department of Hindi at Allahabad University. Jagdish Gupta was born i…
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