कुछ यों's image
0138

कुछ यों

ShareBookmarks

कुछ यों

तोड़ता हूं -
जीवन में सिर नहीं, कविता में शिल्प!
फोड़ सकता हूं पहला, दूसरे के लिए
(कि) हत्यारा नहीं
हूं तो तथाकथित कवि ही

Read More! Learn More!

Sootradhar