कविता की खोज

हरिभक्त कटुवालहरिभक्त कटुवाल2 Jul 1935

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इस शहर में आने-जाने वाली आकृतियों में

कविता को ढूँढ़कर बहुत बार निराश हुआ हूँ

लेकिन सदा अपनी तरह उन चेहरों में भी,

उलझी देखी है दाल-भात की समस्या,

जैसे हम भूल चुके हैं आदमी का अर्थ

और हुकूमत को छोड़कर हम कुछ नहीं सोच सकते

कोई वृत्त लाँघकर, फाँद नहीं सकते हैं हम

फिर कहाँ मिलेगी कविता?

कविता—कहीं भूखे मज़दूर के चेहरे में होगी

जो दिन-भर पत्थर फोड़ता है राजमार्ग में

या रँगरूट के चेहरे में होगी

या गायक भिखारी के चेहरे में होगी

या जो परिवार को भूलकर दरबानी करता है रात-भर

जो पर्यटक से पाँच पैसे प्राप्ति के बाद पचास दुआएँ देता है।

लेकिन मैं एक व्यस्त आदमी

जिसको फ़ुर्सत नहीं कविता ढूँढ़ने की

जो कवि कम और नौकर ज़्यादा है

फिर कहाँ मिलेगी कविता मुझे?

इस वक़्त सोच रहा हूँ

ले जाकर रख दूँ इस ज़िंदगी को किसी अजायबघर में

और चिपका दूँ यह इश्तहार बड़े-बड़े अक्षरों में :

“सिर झुकाकर रोज़गार बचाने में तल्लीन

मृत्यु के साथ भागता हुआ

यह हरिभक्त कटुवाल है, मुर्दा कटुवाल!”

हरिभक्त कटुवाल
About the poet

हरिभक्त कटुवाल

सुपरिचित नेपाली कवि-गीतकार। मूल नाम : हम बहादुर कटुवाल जन्म : 02/07/1935 | डिब्रूगढ़, असम निधन : 10/09/ 1980 | डिब्रूगढ़, असम

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