तुझ को देखा है जो दरिया ने इधर आते हुए's image
0344

तुझ को देखा है जो दरिया ने इधर आते हुए

ShareBookmarks

तुझ को देखा है जो दरिया ने इधर आते हुए

कुछ भँवर डूब गए पानी में चकराते हुए

हम ने तो रात को दाँतों से पकड़ कर रक्खा

छीना-झपटी में उफ़ुक़ खुलता गया जाते हुए

मैं न हूँगा तो ख़िज़ाँ कैसे कटेगी तेरी

शोख़ पत्ते ने कहा शाख़ से मुरझाते हुए

हसरतें अपनी बिलक्तीं न यतीमों की तरह

हम को आवाज़ ही दे लेते ज़रा जाते हुए

सी लिए होंट वो पाकीज़ा निगाहें सुन कर

मैली हो जाती है आवाज़ भी दोहराते हुए

Read More! Learn More!

Sootradhar