हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते's image
1 min read

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते

GulzarGulzar
Share0 Bookmarks 649 Reads

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते

वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन

ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते

लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो

ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते

जागने पर भी नहीं आँख से गिरतीं किर्चें

इस तरह ख़्वाबों से आँखें नहीं फोड़ा करते

शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा

जाने वालों के लिए दिल नहीं थोड़ा करते

जा के कोहसार से सर मारो कि आवाज़ तो हो

ख़स्ता दीवारों से माथा नहीं फोड़ा करते

 

No posts

No posts

No posts

No posts

No posts