सबने तो लिये लूट निज-निज भाग

Gulab KhandelwalGulab Khandelwal21 Feb 1924 – 2 Jul 2017

1 min read · 12.6K reads

सबने तो लिये लूट निज-निज भाग
एक निर्विकल्प मैं ही मौन रहा जाग

किसीको समृद्धि मिली, सुख मिला जी को
कंचन किसीको और कामिनी किसीको
घेर लिया नभ को किसीने धरती को
और मैं सभी को चला त्याग, बिना राग

कोई थे चतुर, नीतिवान कोई ज्ञानी थे
जाति, कुल, बड़प्पन के कोई अभिमानी थे
लूटकर मुहर कोई सूची के दानी थे
फूँक निज घर को मैं रचता था फाग

सबने उढ़ाये अलंकार प्राण-तन को
बाँट दिया मैंने तो निजत्व भी भुवन को
साबुन से धो-धोकर साफ किया मन को
पड़ने दिया न कहीं कोई भी दाग़

सबने तो लिये लूट निज-निज भाग
एक निर्विकल्प मैं ही मौन रहा जाग

Gulab Khandelwal
About the poet

Gulab Khandelwal

Gulab Khandelwal (21 February 1924 - 2 July 2017) was an Indian poet who wrote poetry in different forms such as Lyrics, Sonnets, Rubais (Quatrains), Dohas (Couplets), Odes, Elegies, Lyrical Ballads, Epics, Poetic Dramas, Ghazals, and Masnavi with equal felic…

View profile & all 41 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like