आये थे जो बड़े ही ताव के साथ

Gulab KhandelwalGulab Khandelwal21 Feb 1924 – 2 Jul 2017

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आये थे जो बड़े ही ताव के साथ
बह गए वक्त के बहाव के साथ

बात तो कुछ न हो सकी उनसे
हिचकियाँ बढ़ गईं दबाव के साथ

उनकी अलकें सँवारते हमने
काट दी ज़िन्दगी अभाव के साथ

हम किनारे से दूर जा न सके
एक चितवन बँधी थी नाव के साथ

सर हथेली पे लेके बैठे हैं
कुछ कहे तो कोई लगाव के साथ

हमसे मिलिए तो आइने की तरह
प्यार टिकता नहीं दुराव के साथ

और क्या दाँव पर लगायें अब!
लग चुका सब तो पहले दाँव के साथ

प्यार काँटों में ढूँढ़ते हैं गुलाब
कहाँ जायेंगे इस स्वभाव के साथ!

Gulab Khandelwal
About the poet

Gulab Khandelwal

Gulab Khandelwal (21 February 1924 - 2 July 2017) was an Indian poet who wrote poetry in different forms such as Lyrics, Sonnets, Rubais (Quatrains), Dohas (Couplets), Odes, Elegies, Lyrical Ballads, Epics, Poetic Dramas, Ghazals, and Masnavi with equal felic…

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