कितना कोमल,
कितना वत्सल,
रे ! जननी का
वह अंतस्तल,
जिसका यह शीतल
करुणा जल,
बहता रहता
युग-युग अविरल
कितना कोमल,
कितना वत्सल,
रे ! जननी का
वह अंतस्तल,
जिसका यह शीतल
करुणा जल,
बहता रहता
युग-युग अविरल

Gopal Singh Nepali (11 August 1911 – 17 April 1963) was an Indian poet of Hindi literature and a lyricist of Bollywood. His association with Bollywood spanned around two decades, beginning in 1944 and ended with his death in 1963.Nepali ji, who made a separat…
View profile & all 28 Poems / Storiesमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँनील गगन में पंख पसारूँ;
बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगेसितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे
तू चिंगारी बनकर उड़ री, जाग-जाग मैं ज्वाल बनूँ,तू बन जा हहराती गँगा, मैं झेलम बेहाल बनूँ,
दिल चुरा कर न हमको बुलाया करोगुनगुना कर न गम को सुलाया करो,
प्रिये तुम्हारी इन आँखों में मेरा जीवन बोल रहा हैबोले मधुप फूल की बोली, बोले चाँद समझ लें तारे