अरे युगांतर, आ जल्दी अब खोल, खोल मेरा बंधन

Gopal Singh NepaliGopal Singh Nepali11 Aug 1911 – 17 Apr 1963

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अरे युगांतर, आ जल्दी अब खोल, खोल मेरा बंधन
बंधा हुआ इन जंजीरों से तड़प रहा कब से जीवन
देख, कटी पाँखें कैंची से उड़ सकता न जरा भी मन
भरा कान, पाँव है लंगड़ा, अँधा बना हुआ लोचन
ले जा यह तन ऐसा जीवन, बदले में दे जा यौवन
देजा उस युग का मेरा मन, बदले में लेजा सब धन
आजा ला दे कण-कण में अब फ़िर से ऐसा परिवर्तन
मरता जहाँ आज यह जीवन वहाँ करे यौवन नर्तन

Gopal Singh Nepali
About the poet

Gopal Singh Nepali

Gopal Singh Nepali (11 August 1911 – 17 April 1963) was an Indian poet of Hindi literature and a lyricist of Bollywood. His association with Bollywood spanned around two decades, beginning in 1944 and ended with his death in 1963.Nepali ji, who made a separat…

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