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बोलते में

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बोलते में
मुस्‍कराहट की कनी
रह गई गड़ कर
नहीं निकली अनी

खेल से
पल्‍ला जो उँगली पर कसा
मन लिपट कर रह गया
छूटा वहीं

बहुत पूछा
पर नहीं उत्‍तर मिला
हैं लजीले मौन
बातें अनगिनी

अर्थ हैं जितने
न उतने शब्‍द हैं
बहुत मीठी है
कहानी अनसुनी

ठीक कर लो
अलग माथे पर पड़ी
ठीक से
आती नहीं है चाँदनी

याद यह दिन रहे
चाहें दूर से
दूर ही से सही
आए रोशनी

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Sootradhar