Happy Independence Day! 🇮🇳 इस आज़ादी पर, अपनी कलम को उड़ान दें।

Every verse is an act of freedom — write a poem, share your voice, and celebrate India with Kavishala.

✍️ Write for Freedom
गुनके गाहक सहस नर's image
0724

गुनके गाहक सहस नर

ShareBookmarks

गुनके गाहक सहस नर, बिन गुन लहै न कोय ।

जैसे कागा-कोकिला, शब्द सुनै सब कोय ।

शब्द सुनै सब कोय, कोकिला सबे सुहावन ।

दोऊ को इक रंग, काग सब भये अपावन ॥

कह गिरिधर कविराय, सुनौ हो ठाकुर मन के ।

बिन गुन लहै न कोय, सहस नर गाहक गुनके ॥

Read More! Learn More!

Sootradhar