5) दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः।
ससर्पे गृहे वासो मृत्युरेव न संशयः।।
यह साक्षात् मृत्यु के समान है अगर हम दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर या सर्प के साथ निवास करते है|
5) दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः।
ससर्पे गृहे वासो मृत्युरेव न संशयः।।
यह साक्षात् मृत्यु के समान है अगर हम दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर या सर्प के साथ निवास करते है|

Chanakya (375 BC- 283 BC) was an ancient Indian teacher, philosopher, economist, jurist and royal advisor. He is traditionally identified as Kauṭilya or Vishnugupta, who authored the ancient Indian political treatise, the Arthashastra, a text dated to roughly…
View profile & all 33 Poems / Stories"जैसे एक बछड़ा हज़ारो गायों के झुंड मे अपनी माँ के पीछे चलता है। उसी प्रकार आदमी के अच्छे और बुरे कर्म उसके पीछे चलते हैं।"
प्रभूतंकार्यमल्पंवातन्नरः कर्तुमिच्छति।सर्वारंभेणतत्कार्यं सिंहादेकंप्रचक्षते॥
1) प्रणम्य शिरसा विष्णुं त्रैलोक्याधिपतिं प्रभुम्।नाना शास्त्रोद्धृतं वक्ष्ये राजनीति समुच्चयम्।।
2) अधीत्येदं यथाशास्त्रं नरो जानाति सत्तमः।धर्मोपदेशविश्यातं कार्याऽकार्याशुभाशुभम्।।
4) मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति।।