अच्छे दिन देखना है, साहेब ! बताओ किधर देखूँ? - बोधिसत्व

बोधिसत्वबोधिसत्व11 Sept 1968

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मुझे पत्थर नहीं चलाना
पैलटगन की गोली से
मुझे आँख नहीं फोड़वाना
अच्छे दिन देखना है, साहेब ! बताओ किधर देखूँ?

मुझे नारा नहीं लगाना
मुझे चाय की चाशनी में
डूबे भाषण नहीं चबाना
अच्छे दिन का स्वागत करना है, द्वार कब खोलूँ?

मुझे मन्दिर नहीं जाना
मुझे मस्जिद नहीं जाना
बस पन्द्रह लाख है पाना
सरकार, तुम्ही बताओ, कितने आधार लिंक करूँ?

राफ़ेल का हिसाब नहीं पाना
तेल गैस भी सस्ता नहीं पाना
बच्चों को है इनसान बनाना
बताओ मालिक, उनको किस पाठशाला में रखूँ ?

पाकिस्तान की तुम जानो
गंगा मैया की तुम जानो
अपने गाय बैल लेकर
बताओ प्रभुजी, किस सड़क से ज़िन्दा घर पहुँचू?
बोधिसत्व
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