है यह आजु बसन्त समौ

Bihari LalBihari Lal1 Jan 1595

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है यह आजु बसन्त समौ, सु भरौसो न काहुहि कान्ह के जी कौ

अंध कै गंध बढ़ाय लै जात है, मंजुल मारुत कुंज गली कौ

कैसेहुँ भोर मुठी मैं पर्यौ, समुझैं रहियौ न छुट्यौ नहिं नीकौ

देखति बेलि उतैं बिगसी, इत हौ बिगस्यौ बन बौलसरी कौं।।

Bihari Lal
About the poet

Bihari Lal

Bihari Lal Chaube or Bihārī (1595–1663) was a Hindi poet, who is famous for writing the Satasaī (Seven Hundred Verses) in Brajbhasha, a collection of approximately seven hundred distichs, Kumar which is perhaps the most celebrated Hindi work of poetic art, as…

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