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Poetry & Stories
रेलगाड़ी - बालमुकुंद गुप्त
हिस-हिस हिस-हिस हिस-हिस करती, रेल धड़ाधड़ जाती है,जिन जंजीरों से जकड़ी है, उन्हें खूब खुड़काती है।
प्रभात - बालमुकुंद गुप्त
चटक रहीं बागों में कलियाँ,पंछी करते हैं रंगरलियाँ।
हिम्मत - बालमुकुंद गुप्त
‘कर नहीं सकते हैं’ कभी मुँह से कहो न यार,क्यों नहीं कर सकते उसे, यह सोचो एक बार।
उर्दू को उत्तर
न बीबी बहुत जी में घबराइए,सम्हलिए ज़रा होश में आइए।
राम भरोसा
राम तुम्हारो नाम सुन्यो तुम देखे नाहीं।कैसे हो तुम यहै सोच हमरे मनमाहीं॥
बालमुकुंद गुप्त: Quick Answers
When did बालमुकुंद गुप्त die?
बालमुकुंद गुप्त passed away on 18 September 1907.
Where can I read बालमुकुंद गुप्त's poetry?
Kavishala has 14 poems and stories by बालमुकुंद गुप्त, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by बालमुकुंद गुप्त
रेलगाड़ी - बालमुकुंद गुप्त
हिस-हिस हिस-हिस हिस-हिस करती, रेल धड़ाधड़ जाती है,जिन जंजीरों से जकड़ी है, उन्हें खूब खुड़काती है।
प्रभात - बालमुकुंद गुप्त
चटक रहीं बागों में कलियाँ,पंछी करते हैं रंगरलियाँ।
हिम्मत - बालमुकुंद गुप्त
‘कर नहीं सकते हैं’ कभी मुँह से कहो न यार,क्यों नहीं कर सकते उसे, यह सोचो एक बार।
उर्दू को उत्तर
न बीबी बहुत जी में घबराइए,सम्हलिए ज़रा होश में आइए।
राम भरोसा
राम तुम्हारो नाम सुन्यो तुम देखे नाहीं।कैसे हो तुम यहै सोच हमरे मनमाहीं॥
शारदीय पूजा
(1)सिंहासन तज धीर पदहिं कन्यालय आवत।
जय लक्ष्मी
(1)जयति-जयति लक्ष्मी जयति मा जग-उजियारी।
राम-विनय
अबलों हम जीवत रहे लै-लै तुम्हरो नाम।सोहू अब भूलन लगे, अहो राम गुनधाम॥
हे राम
आज एक बिनती करैं तुम सों रघुकुलराय।कौन दोस लखि नाथ तुम दियो हमहिं बिसराय॥
दुर्गा-स्तवन
(1)आज मधुर धुन बजत सैल-पति भवन बधाई!
जय दुर्गे
(1)जाग-जाग जगदंब मात यह नींद कहाँ की।
मेघ मनावनि
आवहु-आवहु मेघ कहाँ तुम छाय रहे?निज प्रेमिन कहँ भूलि कहाँ बिलमाय रहे?
Selected Quotes by बालमुकुंद गुप्त (चुनिंदा उद्धरण)
चटक रहीं बागों में कलियाँ,पंछी करते हैं रंगरलियाँ।‘कर नहीं सकते हैं’ कभी मुँह से कहो न यार,क्यों नहीं कर सकते उसे, यह सोचो एक बार।हिस-हिस हिस-हिस हिस-हिस करती, रेल धड़ाधड़ जाती है,जिन जंजीरों से जकड़ी है, उन्हें खूब खुड़काती है।आवहु-आवहु मेघ कहाँ तुम छाय रहे?निज प्रेमिन कहँ भूलि कहाँ बिलमाय रहे?न बीबी बहुत जी में घबराइए,सम्हलिए ज़रा होश में आइए।राम तुम्हारो नाम सुन्यो तुम देखे नाहीं।कैसे हो तुम यहै सोच हमरे मनमाहीं॥Videos on बालमुकुंद गुप्त
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