रंग कब बिगड़ सका उनका
रंग लाते दिखलाते हैं ।
मस्त हैं सदा बने रहते ।
उन्हें मुसुकाते पाते हैं ।।१।।
भले ही जियें एक ही दिन ।
पर कहा वे घबराते हैं ।
फूल हँसते ही रहते हैं ।
खिला सब उनको पाते हैं ।।२।।
रंग कब बिगड़ सका उनका
रंग लाते दिखलाते हैं ।
मस्त हैं सदा बने रहते ।
उन्हें मुसुकाते पाते हैं ।।१।।
भले ही जियें एक ही दिन ।
पर कहा वे घबराते हैं ।
फूल हँसते ही रहते हैं ।
खिला सब उनको पाते हैं ।।२।।

Ayodhya Singh Upadhyay ‘Hari Oudh', (15 April 1865 – 16 March 1947) was a writer of Hindi literature. He has been the Chairman of the Hindi Sahitya Sammelan and had been conferred the title of Vidyavachaspati.
View profile & all 40 Poems / Storiesचन्दा मामा दौड़े आओ,दूध कटोरा भर कर लाओ ।
उठो लाल अब आँखे खोलोपानी लाई हूँ मुँह धो लो
आ री नींद, लाल को आ जा।उसको करके प्यार सुला जा।।
उमंगों भरा दिल किसी का न टूटे।पलट जायँ पासे मगर जुग न फूटे।
देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहींरह भरोसे भाग्य के दुख भोग पछताते नहीं