अब वो अगला सा इल्तिफ़ात नहीं's image
0240

अब वो अगला सा इल्तिफ़ात नहीं

ShareBookmarks

अब वो अगला सा इल्तिफ़ात नहीं

जिस पे भूले थे हम वो बात नहीं

मुझ को तुम से ए'तिमाद-ए-वफ़ा

तुम को मुझ से पर इल्तिफ़ात नहीं

रंज क्या क्या हैं एक जान के साथ

ज़िंदगी मौत है हयात नहीं

यूँही गुज़रे तो सहल है लेकिन

फ़ुर्सत-ए-ग़म को भी सबात नहीं

कोई दिल-सोज़ हो तो कीजे बयाँ

सरसरी दिल की वारदात नहीं

ज़र्रा ज़र्रा है मज़हर-ए-ख़ुर्शीद

जाग ऐ आँख दिन है रात नहीं

क़ैस हो कोहकन हो या 'हाली'

आशिक़ी कुछ किसी की ज़ात नहीं

Read More! Learn More!

Sootradhar