चलो - आलोक कुमार मिश्रा

आलोक कुमार मिश्राआलोक कुमार मिश्रा10 Sept 1984

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चलो चान्द पर करें चढ़ाई
बैठ वहाँ पर करें पढ़ाई
सूरज पर भी धावा बोलें
गर्मी उसकी जरा टटोलें

फिर बादल पर झूला झूलें
कूद-कूद कर तारे छू लें
चलें हवा संग दूर देश में
घूमें जब तक रहें जोश में

जब थक जाएँ घर को आएँ
खा-पीकर बिस्तर पर जाएँ ।
आलोक कुमार मिश्रा
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आलोक कुमार मिश्रा

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