अनोखी बन्दूक - आलोक कुमार मिश्रा

आलोक कुमार मिश्राआलोक कुमार मिश्रा10 Sept 1984

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एक बन्दूक बनाऊँ ऐसा
निकले जिससे प्रेम की गोली
जिसको लगे वही फिर बोले
एक-दूजे से मीठी बोली

फिर न होगी कहीं लड़ाई
सभी करेंगे सबकी भलाई
हम बच्चों संग खेलेंगे सब
गुल्ली-डण्डा, छुपन-छुपाई ।
आलोक कुमार मिश्रा
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आलोक कुमार मिश्रा

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