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नज़्म : लता मंगेशकर

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जिसकी आवाज़ है मंदिर के तरन्नुम जैसी
जिसकी आवाज़ है मस्जिद के तबस्सुम जैसी
जिसकी आवाज़ से गिरिजा की सदा आती है
जिसकी आवाज़ से शबदों की दुआ आती है

जिसकी आवाज़ से लोरी में शहद घुलता है
जिसकी आवाज़ से सरगम का जहाँ खुलता है
जिसकी आवाज़ से जीवन ने चहकना सीखा
जिसकी आवाज़ से इस दिल ने बहकना सीखा

जिसकी आवाज़ से चाहत को वफ़ाएँ आईं
हुस्न को नाज़, हसीनों को अदाएँ आईं
जिसकी आवाज़ ने नग़मों को अमर कर डाला
गीत को, नज़्म को, ग़ज़लों को अमर कर डाला

हम जिस आवाज़ के साये में सदा रहते हैं
उसको ही नूर का, ख़ुशबू का पता कहते हैं
सारी दुनिया में, उसे लोग लता कहते हैं

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Sootradhar