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मातृभाषा हिन्दी

वीरेन्द्र जैनवीरेन्द्र जैन
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भाषा कोई भी हो चाहे वो अंग्रेज़ी या फ्रांसीसी, 
जब भी बोली जाती है आधार बनाएगी हिन्दी, 
अक्षर क्षर क्षर हो जाएँ पर हिन्दी रहती अक्षरणीय, 
सारी भाषाओं की ध्वनियों का विज्ञान है ये हिन्दी!!! 
 
केवल राष्ट्र की भाषा ही न राष्ट्र का गौरव है हिन्दी
मन को मोहित करने वाली सुमन सौरभ है हिन्दी
भक्ति की स्वर लाहिरी सी, सुगंधित धूप लोभान जैसी
भोर भए नभ में खग वृन्दों का कलरव है हिन्दी!! 
 
भाषा की

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