Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

A whole poem in two lines — find one by topic, poet or first letter.

शम्अ Sher

5 sher

वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भीइंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे

Parveen Shakir

यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती हैआज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया

Shakeel Badayuni

ऐ शम्अ तेरी उम्र-ए-तबीई है एक रातहँस कर गुज़ार या इसे रो कर गुज़ार दे

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर हैये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे

Shakeel Badayuni

कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाएतुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए

बशीर बद्र