Couplets · शेर
Every Sher, In One Place
A whole poem in two lines — find one by topic, poet or first letter.
शम्अ Sher
5 sher
वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भीइंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे

यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती हैआज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया

ऐ शम्अ तेरी उम्र-ए-तबीई है एक रातहँस कर गुज़ार या इसे रो कर गुज़ार दे

नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर हैये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे

कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाएतुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए
