Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

A whole poem in two lines — find one by topic, poet or first letter.

ईद Sher

4 sher

ईद अब के भी गई यूँही किसी ने न कहाकि तिरे यार को हम तुझ से मिला देते हैं

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

वादों ही पे हर रोज़ मिरी जान न टालोहै ईद का दिन अब तो गले हम को लगा लो

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

है ईद का दिन आज तो लग जाओ गले सेजाते हो कहाँ जान मिरी आ के मुक़ाबिल

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

ईद तू आ के मिरे जी को जलावे अफ़्सोसजिस के आने की ख़ुशी हो वो न आवे अफ़्सोस

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी