Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

A whole poem in two lines — find one by topic, poet or first letter.

दिल्ली Sher

4 sher

दिल्ली में अपना था जो कुछ अस्बाब रह गयाइक दिल को ले के आए हैं उस सरज़मीं से हम

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

इन दिनों गरचे दकन में है बड़ी क़द्र-ए-सुख़नकौन जाए 'ज़ौक़' पर दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

दिल्ली हुई है वीराँ सूने खंडर पड़े हैंवीरान हैं मोहल्ले सुनसान घर पड़े हैं

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली हैजो भी गुज़रा है उस ने लूटा है

बशीर बद्र