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3 sher
हम इश्क़ तेरे हाथ से क्या क्या न देखीं हालतेंदेख आब-दीदा ख़ूँ न हो ख़ून-ए-जिगर पानी न कर
सैलाब-ए-चश्म-ए-तर से ज़माना ख़राब हैशिकवे कहाँ कहाँ हैं मिरे आब-दीदा के
ऐ सकिनान-ए-चर्ख़-ए-मुअल्ला बचो बचोतूफ़ाँ हुआ बुलंद मिरे आब-दीदा का