मेरे शिक्षक

जीवन किसी ने दिया,
जीना किसी ने सीखा दिया।
खुदा की कसम ,
मेरे शिक्षकों ने मुझे काबिल बना दिया ।।
कोरा कागज़ आया था मैं इस जहाँ ,मुझे एक किताब बना दिया ।
खुदा की कसम,
मेरे शिक्षको ने मुझे काबिल बना दिया।।
छू रहा हूँ मैं आज बुलंदिया सारे जहां की
दिल मे तस्वीर ले कर उस इंसान की ,
जिसने खुदा को खुदा बता दिया ।
खुदा की कसम ,
मेरे शिक्षकों ने मुझे काबिल बना दिया।।
नमन करता हूँ उस इंसान को
जिसने मुझे ‘ज़िया ‘ बना दिया।खुदा की कसम,
मेरे शिक्षकों ने मुझे काबिल बना दिया।।

ज़ियाउद्दीन मिर्जापुरी