पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ का श्रृंगार मिट गया.. माथे की बिंदिया, देखो ना मांग का सिंदूर धुल गया.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ का श्रृंगार मिट गया.. माँ के पैरों की बिछिया, देखो ना हाथों का कंगना टूट गया.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ का श्रृंगार मिट गया.. माँ तुम बिन कभी अकेली ना रही, देखो ना आज उसका सारा संसार ही लुट गया.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ का श्रृंगार मिट गया.. स्कूटर पर पीछे बैठ, माँ तुम्हारे साथ ही तो बाजार जाया करती थी.. देखो ना माँ आज, अकेली ही सारी खरीदारी कर आती है.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ खुद को कितना अकेला पाती है.. पहले माँ हमारी शिकायत तुमसे कर दिया करती थी, पर देखो ना आज माँ अपने मन की भी कह नहीं पाती है.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ खुद को कितना अकेला पाती है.. तुम थे ना पापा, तो माँ तुमसे अपने सारे सुख दुःख बांट लिया करती थी .. पर आज देखो ना, माँ कैसे हमें अकेले ही संभाल रही है.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ खुद को कितना अकेला पाती है.. पहले तो माँ खुद को आएने के सामने देख मुस्कुरा लिया करती थी.. आज देखो ना माँ खुद को निहारना ही भूल गयी है.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ कितनी अकेली हो गयी है.. माँ की साडिया, देखो ना माँ का तो जीवन ही बदल गया.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ का श्रृंगार मिट गया.. माँ की धरती, देखो ना माँ का अंबर भी सिमट गया.. पापा तुम्हारे जाने से, देखो ना माँ का श्रृंगार मिट गया..