झुकें कँधे हैंआँखों के नीचे काले घेर हैं।न बूढ़ा हूँन बीमार हूँ।ये बोझ जिम्मेदारियों का दिख नहीं रहा तुम्हें?परबत ढोना आसान हैंएक घर ढ़ोने से।।०५-०३-२०२१
झुकें कँधे हैंआँखों के नीचे काले घेर हैं।
न बूढ़ा हूँन बीमार हूँ।
ये बोझ जिम्मेदारियों का दिख नहीं रहा तुम्हें?
परबत ढोना आसान हैंएक घर ढ़ोने से।।
०५-०३-२०२१