कर ले कितनी भी मनमानियां , इरादों को न तोड़ पायेगा। अपनी सारी कोशिशों तले , न तू मुझको झुका पायेगा।। इम्तिहान तेरी कुछ कम सी है , अभी तो मुझमें साँस बाकी है. करले अपनी मन्नतें पूरी , अभी मेरी बारी बाकी है ।। हसरतें नादानियां तेरी , वक्त तू खुद में पिघल जायेगा। मुझे मिटाने के ख्वाब लिए , तू खुद में कहीं खो जायेगा ।। आजमाइशों की निशानियाँ , होंगी मेरे हर खिताब पर। देखेंगे तुझे तेरे वक़्त में , हारा बैठे मेरे ही द्वार पर ।।