उड़ते पंछी
आसमान में वो उड़ते पंछी,
जो हवा से लड़ते जाते।
जो गगन के पार जा कर,
मंजिले खुद के बनाते।।
वे जो प्रेरणा के हैं आशा,
नाम उसका हम है लेते।
वे वो उड़ते जोश हैं जो,
पंख फैला दुनिया समेटे।।
सूखी टूटी टहनियों से,
वो नयी दुनिया सजाते।
डाल पर बैठे स्वर में,
हैं दृढ़ता से गीत गाते।।
वे हैं वो जो रात्रि को भी,
सूर्य बिन सवेरा बनादें।
निराशा भरी अंधकार में,
आशा की इक लौ जलादें।।
